Wednesday, April 9, 2014

इसलिए दिया कांग्रेस ने राय को वानारसी से टिकिट

नई दिल्ली
बनारस की तंग गलियों में लोग बड़े भरोसे के साथ
कहते हैं कि 2009 के लोकसभा चुनाव में बनारस से
मुरली मनोहर जोशी हार गए होते यदि उनके
खिलाफ मुख्तार अंसारी नहीं होते। मुख्तार
अंसारी के कारण 2009 में सांप्रादायिक
ध्रुवीकरण हुआ था और
इसका फायदा मुरली मनोहर जोशी को मिला।
लोग कहते हैं कि यह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण
मतदान के महज 48 घंटे पहले हुआ था। तब अजय
राय बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के कारण
बागी बन गए थे और उन्होंने
समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था।
उस वक्त अजय राय के आने से
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में पर्याप्त
जोश था।
राय का स्थानीय होना उनके पक्ष में
जा रहा था और जोशी की जीत की उम्मीद
लगभग खत्म हो रही थी। लेकिन मुरली मनोहर
जोशी ने अपने कैंपेन को अपनी जीत से
ज्यादा डॉन मुख्तार अंसारी की हार पर फोकस
कर दिया। उन्होंने अपने चुनावी कैंपेन में लोगों से
साफ कहा कि मेरे अलावा किसी और को वोट
देना डॉन मुख्तार अंसारी को जीत
दिलाना होगा। खास करके सवर्ण हिन्दुओं में
मुख्तार अंसारी की छवि एक गुंडे और बदमाश
की है। जोशी की यह रणनीति उनके पक्ष में गई।
ऐसे में रातों-रात सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ
और जोशी ने मुख्तार अंसारी को 17,000
वोटों के अंतर से हरा दिया।
इसके बावजूद अजय राय ने
बीजेपी को अपनी ताकत का अहसास
करा दिया था। वह बनारस के चुनावी मैदान में
बीजेपी से बागी होकर महज एक हफ्ते पहले आए
थे। लेकिन वह 1, 23, 874(18%) वोट के साथ
तीसरे नंबर पर रहे।
बनारस से आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद
केजरीवाल और बीजेपी के प्रधानमंत्री कैंडिडेट
नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद
सबकी नजर कांग्रेस पर थी वह किसे मैदान में
उतारती है। अजय राय भगवा, समाजवादी से होते
हुए कांग्रेसी बन चुके थे। वह कांग्रेस के टिकट पर
ही पिंडरा से विधायक हैं। उन्होंने मोदी के
खिलाफ कांग्रेस से टिकट के लिए
दावेदारी भी ठोक दी थी। लेकिन बनारस से
कांग्रेस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा भी टिकट के
लिए दिल्ली में बैठे थे। कांग्रेस ने अजय राय पर
ही भरोसा जताया। अब अजय राय का कहना है,
'मैं गारंटी देता हूं कि मोदी को बनारस से
हरा दूंगा। मोदी देश के लिए वास्तविक
चुनौती हैं।' राय खुद को धरतीपुत्र बनाम
बाहरी पेश कर रहे हैं। उनका कहुना है कि लड़ाई
केजरीवाल बनाम मोदी नहीं है बल्कि लोकल
बनाम बाहरी है। राय ने कहा कि मोदी और
केजरीवाल बनारस की धड़कन को नहीं समझते हैं।
बनारस को वैसा सांसद चाहिए जो शहर
की मिट्टी को समझने में सक्षम है। उन्होंने
कहा कि केजरीवाल जीतने के बाद दिल्ली भाग
जाएंगे और मोदी वड़ोदरा। यह तो लोगों के साथ
छल होगा। अजय राय मोदी की हवा को सिरे से
खारिज करते हैं।
कांग्रेस लीडर्स ने कहा कि उन्हें लगता है
कि यूपी में बीजेपी के टिकट बंटवारे से ब्राह्मण-
भूमिहार कम्युनिटी नाखुश है, ऐसे राजेश
मिश्रा की तुलना में राय की उम्मीदवारी इस
असंतोष का बेहतर तरीके से फायदा उठा पाएगी।
2009 के इलेक्शन में कांग्रेस ने राजेश
मिश्रा को कैंडिडेट बनाया था, लेकिन वह चौथे
नंबर पर रहे थे।
अजय राय ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत
बीजेपी से स्टूडेंट विंग एबीवीपी से की थी। तब वह
काशी विद्यापीठ से ग्रैजुएशन कर रहे थे। 1996 में
इन्होंने तब जोरदार दस्तक दी जब नौ बार से
कोलसला से सीपीआई के सीटिंग एमएलए उड़ाल
को हरा दिया। उसके बाद से इस सीट पर अजय
राय का ही कब्जा है। अब अजय राय कहते हैं,
'मेरा मिशन बीजेपी को सबक सिखाना है। मुझसे
बीजेपी ने 2009 में बनारस से लोकसभा टिकट देने
का वादा किया था। लेकिन अंतिम क्षणों में
मेरा टिकट काट जोशी को दे दिया गया।

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