साल था 2009 तारिख थी 21 जुलाई जब में पहली बार अपने कॉलेज पंहुचा सबसे पहले में अपनी निर्धारित कक्षा कक्ष में गया वहा सब अजनबी चेहरे थे कोइ पहचान वाला चेहरा नही दिखा बस सब अजनबी थे कॉलेज खुले अभी कुछ ही दिन हुए थे इसलिए उन चेहरो के लिए भी कॉलेज भी अनजान था उस अजनबी में भीड़ में मुझे कोई अपना लगा में जिस बेंच पर बेठा था उसके पास ही एक और लड़का बेठा था सरीफ दिख रहा था इसलिए मेने बात करना उचित नही समझा तभी वो लड़का बोला जो नया लड़का आता है वो आगे की बेंच पर बेठता है मेने उसकी बात को नजरंदाज कर दी मन ही मन उसे गाली देने लगा तभी लंच की बेल बजी में भी इसी चक्कर में था कब लंच हो और कब दौड़ कर केंटिन पहुच जाऊ पेट में चूहे कूद रहे थे घंटी की आवाज सुन कर में उठा लेकिन में उसका इन्त्जार करने लगा लेकिन वो नही उठा में भी उसका इंतजार करने लगा तभी एक पतला सा लड़का आया और उसने उस लड़के को हाथो में उठा लिया तभी मुझे अहसास हुआ की ये लड़का विकलांग है और ये अपने पैरो से नही चल सकता बस एक सहानुभूति उससे जुड़ गयी
आगे जारी रहेगा
Wednesday, April 9, 2014
एक अजीब सी दोस्ती
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