Saturday, April 12, 2014

वोट बैंक की राजनीती के चलते बाड़मेर रहा पीछे -मोदी

पानी, तेल, विकास और पाक विस्थापितों के
पुनर्वास के मुद्दे पर केन्द्र सरकार पर
निशाना साधा। मोदी ने कहाकि वोट बैंक
की राजनीति के चलते बाड़मेर विकास में पीछे रह
गया। आज भी यहां पर लोग पानी और शिक्षा के
लिए तरस रहे हैं। बाड़मेर में किसानों की जमीन
लूट ली गई और भूमाफिया सक्रिय हो गया। इस
दौरान मोदी ने जसवंत सिंह पर नाम लिए
बिना निशाना साधते हुए कहाकि लोग पांच साल
तक मुंडी नहीं दिखाते और चुनाव में सामने आते है।
इस दौरान मोदी ने राहुल गांधी के धूम-3 फिल्म
वाले बयान पर पलटवार किया। मोदी ने
कहाकि धूम फिल्म में मोटर साइकिल और
चोरी की कहानी है। राजस्थान के गोपालगढ़ में
जब दंगे हुए तो राहुल गांधी तत्कालीन
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अंधेरे में रखकर
यहां आए। वे जिस मोटर साइकिल पर आए वह
चोरी की थी। जिस आदमी के साथ वह बैठे वह
हिस्ट्रीशीटर था। राहुल गांधी अपनी मां के
साथ मिलकर अब धूम और धूम-2 बना चुके लेकिन
धूम-3 नहीं बना पाएंगे। गौरतलब है कि शुक्रवार
को राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में
कहाकि था कि भाजपा धूम फिल्म की तरह
प्रचार कर रही है।
मोदी ने कहाकि कांग्रेस ने कई बार उन्हें जेल में
रखने की कोशिश की। देश की अदालतों में झूठे
केस दर्ज कराए लेकिन एक दिन भी मुझे जेल में
नहीं रख पाए। कांग्रेस मोदी को रोकने के लिए
नाक रगड़ रही, हाथ जोड़ रही है। कांग्रेस सबसे
कह रही है कि मोदी को रोको। उन्होंने
कहाकि इस तरह का चुनाव उन्होंने पहले
कभी नहीं देखा। देश के कई राज्यों मे कांग्रेस
का खाता भी नहीं खुलेगा और राजस्थान भी उन
राज्यों में से एक है। इसके अलावा कई राज्यों में
कांग्रेस दहाई तक भी नहीं पहुंच पाएगी।
रैली के दौरान मोदी ने कहाकि हम
नदियों को जोड़ना चाहते है। इससे
पानी की समस्या से जूझते रेगिस्तान के
लोगों को राहत मिलेगी साथ ही बाढ़
की समस्या भी दूर होगी। नदियों को जोड़ने
का पूर्व प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी का सपना था और उन्होंने
इसके लिए विशेष प्रयास किए थे। लेकिन यूपीए
सरकार ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

Friday, April 11, 2014

जसवंत युवा आर्मी ने किया जनसम्पर्क

बाड़मेर जसवंत युवा आर्मी ने शहर के विभिन्न मोहल्लो में जनसम्पर्क कर निर्दलीय प्रत्य्यासी जसवंत सिंह जसोल के पक्ष में मतदान करने की अपील की युवा नेता हिन्दूसिंह तामलोर ने बताया की आर्मी ने शहर के अम्बेडकर कोलोनी महावीर नगर नेहरु नगर में जनसम्पर्क कर जसवंत सिंह जसोल को जिताने की अपील की इस मौके पर आनद सिंह लाबडा विक्रम सिंह कोटडा राहुल जैन लोकेन्द्र सिंह ढीमा तरुण मुखी विक्रम सिंह जैसिंधर गोपाल जांगिड भरत जांगिड हंसराज सहित कई कार्यकर्ता मोजूद रहे

Thursday, April 10, 2014

जसवंत सिंह के घोषणा पत्र से बीजेपी में खलबली

बाड़मेर। भाजपा से बागी होकर निर्दलीय के रूप
में ताल ठोकने वाले जसवंत सिंह ने गुरूवार
को अपना घोष्ाणा पत्र जारी किया। इसमें
जसवंत सिंह ने 21 घोषणाएं की है। बाड़मेर
लोकसभा सीट पर संभवतया पहली बार
किसी निर्दलीय प्रत्याशी ने लोकसभा क्षेत्र
से संबंधित घोषणा पत्र जारी किया है।
जसवंत ने बाड़मेर में प्रेस कांफेंस कर
अपना घोषणा पत्र जारी किया। घोषणा पत्र
में क्षेत्र के स्थानीय और राष्ट्रीय
मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें जहां एक
ओर पाक विस्थापितों, थार एक्सप्रेस जैसे बड़े
मुद्दे को जगह दी गई है वहीं डोडा पोस्त
की उपलब्धता को भी शामिल किया गया है।
जसवंत सिंह द्वारा घोषणा पत्र जारी करने के
बाद भाजपा के पेशानियों पर बल पड़ने
की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है
कि जसवंत ने चुनाव लड़ने की घोषणा के वक्त
कहा था कि ये असली-
नकली भाजपा की लड़ाई।
मानवेन्द्र पर कार्रवाई को भाजपा आजाद
भाजपा की ओर से शिव विधायक मानवेन्द्रसिंह
के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात पर
जसवंत ने कहा कि पिता-पुत्र
का रिश्ता संवेदनाओं से जुड़ा होता है। इस पर
सवाल उठाना गलत है। जहां तक मानवेन्द्र के
खिलाफ कार्रवाई का प्रश्न है इसके लिए
भाजपा स्वतंत्र है।
घोषणाएं इस प्रकार है:
सामाजिक समरसता
निजी कंपनियों में स्थानीय लोगों को रोजगार
में प्राथमिकता।
उच्च शिक्षा केन्द्र।
थार एक्सप्रेस का प्रतिदिन संचालन और
बाड़मेर में ठहराव।
राजमार्ग 15 की पाबंदी पर पुनर्विचार।
जोधपुर में वीजा केन्द्र।
पाक विस्थापितों की समस्या का समाधान।
पेयजल व सिंचाई के लिए पानी।
जिले में महिला व शिशु
चिकित्सकों की नियुक्ति।
उत्तरलाई से व्यवसायिक उड़ान।
लंबी दूरी की रेलों का बाड़मेर से संचालन।
मरूगोचर व डेयरी विकास।
डीएनपी की समस्याओं का समाधान।
हैण्डीक्राफ्ट व नमक उद्योग की स्थापना।
पशुधन की सुविधा।
डोडा पोस्त की उपलब्धता।
पर्यटन विकास।
धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं करना।
कपड़ा व ग्वार गम उद्योग को प्रोत्साहन।
इंदिरा गांधी नहर पर भूमिहीनों को जमीन
आवंटन।
प्लास्टिक थैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध।
-

एक परिचय स्व श्री गंगाराम

बाड़मेर जिले की राजनितिक की दशा और
दिशा दोनों गंगाराम तय करते थे गंगाराम चौधरी
आपका जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले
की रामसर तहसील के खडीन) गाँव में 1 मार्च
1922को मालानी के किसान क्रांति के जनक
रामदान चौधरी (डऊकिया) और
किस्तुरी देवी भाकर के घर हुआ.
रामदान चौधरी (डऊकिया) के पांच पुत्रथे
:केसरी मल,
लालसिंह हाकम, गंगाराम, फ़तेह सिंह और
खंगारमल.
वकालत से जनसेवा-
गंगाराम चौधरी ने बी.ए.
एल.एल.बी.की डिग्रियां हासिल कर वकालत
को अपना पैसा बनाया. इससे पूर्व आपने रेलवे में
एल.डी.सी. का कार्य किया. जागीरदारी के
समय किसानों पर होने वाले अत्याचारों, चौरी-
डकैती,जमीन सम्बन्धी विवादों की न्यायलय में
पुरजोर पैरवी की, गरीब किसानों की निशुल्क
पैरवी की.
सीमान्त क्षेत्र में आत्मरक्षार्थ बन्दूक लाईसेंस
दिलवाया.
पिताजी रामदान चौधरी के नेतृत्व में किसान
सभा एवं किसान जाग्रति हेतु आपने इतने काम
करवाए कि आज आप राजस्व के टोडर मल कहे
जाते हैं.
राजनीती में-
आदर्श पिता रामदान चौधरी के पुत्र गंगाराम
चौधरी एक मात्र विधायक थे जिन्होंने तीन
विधानसभा क्षेत्रो का प्रतिनिधित्व किया।
राजनीती में प्रधान से लेकर मंत्री तक का सफ़र
तय कर गंगा राम चौधरी ने अपने आपको कद्दावर
जाट नेता के रूप में स्थापित किया।
उन्हें नाथूराम मिर्धा के समकक्ष नेता मानते
थे ,बाड़मेर जिले की राजनीती गंगाराम से शुरू
हो कर गंगाराम पर ख़त्म हो जाती।
उनका राजनितिक कद राजनैतिक पार्टियों पर
हमेशा भारी रहा कांग्रेस ,भाजपा ,जनतादल ,,
और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारे, चुनाव
जीतते गए ,उनकी राजनितिक क्षमता अकूत
थी जिसका यहाँ कोई सानी नहीं ,
गंगा राम ,अब्दुलहादी ,श्रीमती मदन कौर
लाज़वाब तिकड़ी थी। गंगाराम राज्य सरकारों में
मंत्री भी रहे ,राजस्वमंत्री के रूप में वे थे ,उन्होंने
किसानो को बड़ी राहत दी। बाड़मेर ,गुडा चौहटन
से विधायक रहे ,जिला प्रमुख भी रहे।
२००८ चुनावो में उनकी टिकट काटने के बाद
राजनीती से मोह भंग हो गया ,बाद में गंगाराम
चौधरी ने राजनीती में आकर राजस्थान के
विभिन्न विभागों में मंत्री रहकर
जनता की सेवा की.
जनप्रतिनिधि के रूप में आपका पदार्पण
धोरीमन्ना पंचायत समिति के प्रधान के रूप में
1959में हुआ.
1962 में गुढ़ा मालानी से विधायक,
1980 तक लगातार गुढा मालानी व बाड़मेर से
विधायक बन विधान सभा में प्रतिनिधित्व
किया.
1967 में राजस्व उप-मंत्री बने.
1977 में कांग्रेस छोड़कर चरण सिंह के साथ
कांग्रेस(अर्स) में आये.
1985 में बाड़मेर से विधायक चुने गए.
1985 -1990 बाड़मेर से लोकदल के सदस्य रहे
1990 - 1992 बाड़मेर से जनता दल के सदस्य
रहे.शेखावत सरकार में 24 नवम्बर 1990 से 15
दिसंबर1992 तक राजस्व, भूमि सुधार एवं
उपनिवेश विभागों में मंत्री रहे. *
1993 में निर्दलीय विधायक चुने गए और शेखावत
सरकार में समर्थन देकर राजस्व एवं उपनिवेश
विभागों में मंत्री रहे.
31 अगस्त 1998 को 20 वर्ष बाद कांग्रेस में आये
तथा बाड़मेर जिला परिषद् के प्रमुख बने.दिसंबर
2003 में भाजपा में आकर चोहटन विधायक
बने.आपने 30 वर्ष तक राजस्थान विधान सभा में
बाड़मेर का प्रनिनिधित्व किया तथा 13 वर्ष
मंत्रिमंडल केसदस्य रहे.
.................
एसए राजनीतिक पुरोधा का निधन सम्पूर्ण
मारवाड के लिए अपूरणीय क्षति है.....
.....
शत शत नमन.
श्रद्धासुमन
तरुण मुखी

Wednesday, April 9, 2014

मेरा जीवन पार्ट-2

एक सहानुभूति सी जुड़ गयी थी सोच रहा था भगवान सबको एक जेसा क्यों नही बनता केंटिन पहुचने के बाद मेने सबसे परिचय करने की सोची में उस विकलांग लड़के के पास गया और हाथ आगे किया उसने तुरंत अपना हाथ आगे किया और बोला में इश्वर जांगिड और तुम मेने कहा वेसे सभी लोग मुझे तरुण मुखी नाम से जानते है बस उस पल हम एक दुसरे के दोस्त बन गए  बस फिर क्या था मस्ती केंटिन में हमारी कॉलेज के दिन काटने लगे में शादी शुदा था लेकिन मेरी कक्षा में दो चार गोरी और खुबसुरत लडकिया थी इसलिए मेने शादी की बात किसी को बताना उचित नही समझा बस किसी गोरी लड़की की हाँ का इंतजार करने लगा इन दिनों में भी नया शहर आया था रहने का कोइ अपना ठिकाना नही था इसलिए अपने ससुराल में रहने लगा लेकिन मेरी कोलेज के एक प्रोफेसर साहब मेरे ससुराल के बगल में रहते थे में भी अपने रंग में आ गया था रोज नया कारनामा करता था कभी हड़ताल कभी झगड़ा कभी सुलह इस तरह कॉलेज की भीड़ में मेने अपनी जगह बना दी थी सब लोग मुझे मुखी नाम से जानने लगे थे जिल्ले का पहला तकनिकी महाविधालय था इसलिए कई छात्र राजनीती के सन्गठन आये दिन सम्पर्क करके जुड़ने का कहते अखिल भारतीय विधार्थी परिषद ने मुझे सक्रिय राजनीती में आने का अवसर दिया परिषद ने मुझे मेरी महाविधालय का प्रमुख बना दिया था इससे मेरे होसले सातवे आसमान पर थे बस रोज कोई न कोइ बहाना खोजने लगा ताकि कॉलेज प्रशासन को तंग किया जाये न चाहते हुए भी मेने एक दुश्मनी मोल ले ली थी कॉलेज प्रशासन के गलत व्यवहार से कई छात्र परेशान थे इस कारण कई लोग मेरी बातो का समर्थन करने लगे यहाँ तक की कोलेज के कई प्रोफेसर भी पूरा समर्थन कर रहे थे ये बात कॉलेज प्रशन को अखर रही थी
जारी है.........

सचिन की होगी वापसी

मुंबई: गत चैम्पियन मुंबई इंडियंस ने आज
महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर
को 16 अप्रैल से शुरू हो रहे इंडियन
प्रीमियर लीग से पहले अपना ‘आइकन’
खिलाड़ी बनाया .
टीम की मालिक नीता अंबानी ने एक
बयान में कहा ,‘‘ हमें खुशी है कि सचिन
मुंबई इंडियंस के आइकन होंगे . हमें
यकीन है कि टीम के युवाओं को उनके
मार्गदर्शन का फायदा मिलेगा .’’
तेंदुलकर आईपीएल के पहले सत्र से मुंबई
इंडियंस के आइकन खिलाड़ी थे .
अंबानी ने कहा ,‘‘ सचिन मुंबई इंडियंस
का अभिन्न हिस्सा हैं और टीम के
प्रेरणास्रोत भी हैं . पिछले साल हमने
आईपीएल और चैम्पियंस लीग जीतकर
उन्हें माकूल विदाई दी .’’ तेंदुलकर ने
कहा ,‘‘ मैं शुरू ही से मुंबई इंडियंस
का हिस्सा रहा हूं और यह जुड़ाव
जारी रहने की मुझे खुशी है . यह सत्र
मेरे लिये अलग अनुभव होगा और मैं
अनुभवी सहयोगी स्टाफ के साथ
मिलकर अपना अनुभव युवाओं के साथ
बांटने को बेताब हूं .’’

शादी शुदा है मोदी

बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार
नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को चुनाव आयोग के
समक्ष दाखिल अपने हलफनामे में खुद
को शादीशुदा बता कर यह
खुलासा किया कि उनकी पत्नी का नाम
जशोदाबेन है. वड़ोदरा लोकसभा सीट के लिए
बुधवार को अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल
किए गए हलफनामे में मोदी ने पहली बार खुद के
शादीशुदा होने की बात कही है. मोदी अभी तक
पत्नी के बारे में जानकारी देने वाले कॉलम
को खाली छोड़ देते थे.
हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने
अपनी पत्नी के नाम से संपत्ति की घोषणा किए
जाने वाले कॉलम में लिखा था कि उन्हें इस बारे
में कोई जानकारी नहीं हैं. वड़ोदरा जिला चुनाव
अधिकारी ने इस हलफनामे को कलेक्टरेट के
डिसप्ले बोर्ड पर रात में लगाया.
गौरतलब है कि कांग्रेस ने
कहा था कि मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए
अपना नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त
अपनी वैवाहिक स्थिति पर रूख साफ
करना चाहिए.

तीसरे चरण के मदतान में आज 91 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं... जानें फैक्टस और फीगर क्या हैं...

एक अजीब सी दोस्ती

साल था 2009 तारिख थी 21 जुलाई जब में पहली बार अपने कॉलेज पंहुचा सबसे पहले में अपनी निर्धारित कक्षा कक्ष में गया वहा सब अजनबी चेहरे थे कोइ पहचान वाला चेहरा नही दिखा बस सब अजनबी थे कॉलेज खुले अभी कुछ ही दिन हुए थे इसलिए उन चेहरो के लिए भी कॉलेज भी अनजान  था उस अजनबी में भीड़ में मुझे कोई अपना लगा में जिस बेंच पर बेठा था उसके पास ही एक और लड़का बेठा था सरीफ दिख रहा था इसलिए मेने बात करना उचित नही समझा तभी वो लड़का बोला जो नया लड़का आता है वो आगे की बेंच पर बेठता है मेने उसकी बात को नजरंदाज कर दी मन  ही मन उसे गाली देने लगा तभी लंच की बेल बजी में भी इसी चक्कर में था कब लंच हो और कब दौड़ कर केंटिन पहुच जाऊ पेट में चूहे कूद रहे थे  घंटी की आवाज सुन कर में उठा लेकिन में उसका इन्त्जार करने लगा लेकिन वो नही उठा में भी उसका इंतजार करने लगा तभी एक पतला सा लड़का आया और उसने उस लड़के को हाथो में उठा लिया तभी मुझे अहसास हुआ की ये लड़का विकलांग है और ये अपने पैरो से नही चल सकता बस एक सहानुभूति उससे जुड़ गयी
आगे जारी रहेगा

इसलिए दिया कांग्रेस ने राय को वानारसी से टिकिट

नई दिल्ली
बनारस की तंग गलियों में लोग बड़े भरोसे के साथ
कहते हैं कि 2009 के लोकसभा चुनाव में बनारस से
मुरली मनोहर जोशी हार गए होते यदि उनके
खिलाफ मुख्तार अंसारी नहीं होते। मुख्तार
अंसारी के कारण 2009 में सांप्रादायिक
ध्रुवीकरण हुआ था और
इसका फायदा मुरली मनोहर जोशी को मिला।
लोग कहते हैं कि यह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण
मतदान के महज 48 घंटे पहले हुआ था। तब अजय
राय बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के कारण
बागी बन गए थे और उन्होंने
समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था।
उस वक्त अजय राय के आने से
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में पर्याप्त
जोश था।
राय का स्थानीय होना उनके पक्ष में
जा रहा था और जोशी की जीत की उम्मीद
लगभग खत्म हो रही थी। लेकिन मुरली मनोहर
जोशी ने अपने कैंपेन को अपनी जीत से
ज्यादा डॉन मुख्तार अंसारी की हार पर फोकस
कर दिया। उन्होंने अपने चुनावी कैंपेन में लोगों से
साफ कहा कि मेरे अलावा किसी और को वोट
देना डॉन मुख्तार अंसारी को जीत
दिलाना होगा। खास करके सवर्ण हिन्दुओं में
मुख्तार अंसारी की छवि एक गुंडे और बदमाश
की है। जोशी की यह रणनीति उनके पक्ष में गई।
ऐसे में रातों-रात सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ
और जोशी ने मुख्तार अंसारी को 17,000
वोटों के अंतर से हरा दिया।
इसके बावजूद अजय राय ने
बीजेपी को अपनी ताकत का अहसास
करा दिया था। वह बनारस के चुनावी मैदान में
बीजेपी से बागी होकर महज एक हफ्ते पहले आए
थे। लेकिन वह 1, 23, 874(18%) वोट के साथ
तीसरे नंबर पर रहे।
बनारस से आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद
केजरीवाल और बीजेपी के प्रधानमंत्री कैंडिडेट
नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद
सबकी नजर कांग्रेस पर थी वह किसे मैदान में
उतारती है। अजय राय भगवा, समाजवादी से होते
हुए कांग्रेसी बन चुके थे। वह कांग्रेस के टिकट पर
ही पिंडरा से विधायक हैं। उन्होंने मोदी के
खिलाफ कांग्रेस से टिकट के लिए
दावेदारी भी ठोक दी थी। लेकिन बनारस से
कांग्रेस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा भी टिकट के
लिए दिल्ली में बैठे थे। कांग्रेस ने अजय राय पर
ही भरोसा जताया। अब अजय राय का कहना है,
'मैं गारंटी देता हूं कि मोदी को बनारस से
हरा दूंगा। मोदी देश के लिए वास्तविक
चुनौती हैं।' राय खुद को धरतीपुत्र बनाम
बाहरी पेश कर रहे हैं। उनका कहुना है कि लड़ाई
केजरीवाल बनाम मोदी नहीं है बल्कि लोकल
बनाम बाहरी है। राय ने कहा कि मोदी और
केजरीवाल बनारस की धड़कन को नहीं समझते हैं।
बनारस को वैसा सांसद चाहिए जो शहर
की मिट्टी को समझने में सक्षम है। उन्होंने
कहा कि केजरीवाल जीतने के बाद दिल्ली भाग
जाएंगे और मोदी वड़ोदरा। यह तो लोगों के साथ
छल होगा। अजय राय मोदी की हवा को सिरे से
खारिज करते हैं।
कांग्रेस लीडर्स ने कहा कि उन्हें लगता है
कि यूपी में बीजेपी के टिकट बंटवारे से ब्राह्मण-
भूमिहार कम्युनिटी नाखुश है, ऐसे राजेश
मिश्रा की तुलना में राय की उम्मीदवारी इस
असंतोष का बेहतर तरीके से फायदा उठा पाएगी।
2009 के इलेक्शन में कांग्रेस ने राजेश
मिश्रा को कैंडिडेट बनाया था, लेकिन वह चौथे
नंबर पर रहे थे।
अजय राय ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत
बीजेपी से स्टूडेंट विंग एबीवीपी से की थी। तब वह
काशी विद्यापीठ से ग्रैजुएशन कर रहे थे। 1996 में
इन्होंने तब जोरदार दस्तक दी जब नौ बार से
कोलसला से सीपीआई के सीटिंग एमएलए उड़ाल
को हरा दिया। उसके बाद से इस सीट पर अजय
राय का ही कब्जा है। अब अजय राय कहते हैं,
'मेरा मिशन बीजेपी को सबक सिखाना है। मुझसे
बीजेपी ने 2009 में बनारस से लोकसभा टिकट देने
का वादा किया था। लेकिन अंतिम क्षणों में
मेरा टिकट काट जोशी को दे दिया गया।

कांग्रेस का मोदी पर बड़ा आरोप प्रचार में 10000 करोड़ रूपये कहा से आये

मुश्लिम वोटर भ्रम में आखिर किसे वोट दे

यूपी के कारोबारी नदीमुल हसन भारत के करीब
18 करोड़ मुस्लिम वोटरों में से एक। देश में चुनाव
आते ही मुसलमान वोटों की नजर से देखे जाने
लगते हैं। बीजेपी सहित सभी पार्टियों ने
मुसलमानों के लिए कुछ नया करने का एलान
किया है।
हसन भी मानते हैं कि मुसलमानों को सिर्फ वोट
बैंक के रूप में देखा जाता है, 'मुसलमानों के लिए
भारत की आजादी से आज तक किसी ने कुछ
नहीं किया है। हर कोई एक जैसे वादे करता है। मुझे
जरा भी हैरानी नहीं होगी अगर नई सरकार
भी सत्ता में आने के बाद यह भूल जाए
कि मुसलमान भी भारत का हिस्सा है।'
भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक जरूर हैं लेकिन
उनका हिस्सा बहुत बड़ा है। करीब 14 फीसदी।
इससे उनकी भागीदारी अल्पसंख्यकों से
कहीं ज्यादा हो जाती है। अनुमान है
कि लोकसभा की 20 फीसदी सीटों के नतीजे
मुस्लिम वोटर तय करते हैं।
राजनीतिक पार्टियां मुसलमानों से धर्म के नाम
पर वोट जरूर मांगती हैं लेकिन वादों को भूलने में
उन्हें जरा भी वक्त नहीं लगता। भारतीय
मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक
हालात का जायजा लेने वाली सच्चर
कमेटी की रिपोर्ट ने 2006 में बताया कि 'भारत
में मुसलमानों की हालत अनुसूचित
जाति जनजाति के लोगों से भी बुरी है' और देश
की नौकरशाही में उनकी भागीदारी ढाई
फीसदी भी नहीं।
इसके बाद कमेटी की कई सिफारिशें लागू हुईं और
उनके कामकाज की रिपोर्ट के लिए जेएनयू के
प्रोफेसर अमिताभ कुंडू की अध्यक्षता में
दूसरी कमेटी बनी। कुंडू ने डॉयचे वेले को बताया,
'मुसलमानों को उम्मीद थी कि उनके हित में कुछ
बेहतर होगा। लेकिन मेरे ख्याल से पिछले पांच छह
सालों में वर्तमान सरकार के प्रदर्शन से उन्हें
निराशा हुई होगी।'
सरकार पर 10 साल से काबिज कांग्रेस आम तौर
पर मुसलमानों की पहली पसंद हुआ करती थी।
लेकिन रिपोर्ट बताती है कि उसने
भी मुस्लिमों के लिए कुछ नहीं किया और ऊपर से
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आम भारतीय उससे त्रस्त
है। सवाल उठता है कि ऐसे में भारत का मुसलमान
विकल्प के तौर पर किसे देखता है।
सबसे मजबूत विकल्प विकास का वादा करने वाले
बीजेपी के नरेंद्र मोदी हैं, लेकिन उनके दामन पर
गुजरात दंगों का दाग है और उन्हें भारत का आम
मुसलमान नहीं चाहता। चुनाव समीक्षक संजय
कुमार कहते हैं कि मुसमलानों के लिए
बीजेपी की छवि ऐसी है कि उसे हर हाल में
हराया जाए, 'जब मुसलमान वोट डालने जाते हैं
तो उनकी प्राथमिकता उसे वोट देने की होती है
जो उस निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी को हरा सके।'
1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने
की घटना और 2002 के गुजरात दंगे भारत के
मुसलमानों को बीजेपी के खिलाफ खड़ा करते हैं।
बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद पूरे भारत में
सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जबकि गुजरात दंगों में
हजारों लोगों की जान गई थी, जिनमें से
ज्यादातर मुसलमान थे।
उत्तर प्रदेश में भारत के सबसे ज्यादा मुसलमान
रहते हैं लेकिन बीजेपी ने वहां से एक भी मुस्लिम
को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया है। फिर
भी पार्टी के मुस्लिम चेहरे मुख्तार अब्बास
नकवी कहते हैं कि मुसलमानों के बीच
उनकी पार्टी 'की छवि बिगाड़ने की साजिश'
लंबे वक्त से रची गई है, वह छवि बहुत सोच समझ
कर रणनीति के तहत बनाई गई थी।
उनके मुताबिक, 'हमने इसे बदलने की भी कोशिश
की हालांकि हमें जितनी कोशिश करनी चाहिए
थी उतनी कोशिश हम नहीं कर पाए। पिछले तीन
सालों में हमने एक बड़े स्तर पर मुहिम चलाई
कि समाज के सभी तबकों में, खास कर
मुसलमानों में, बीजेपी को लेकर जो अवधारणा है
उसमें बदलाव आए और वे हमारे साथ जुड़ें।
इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी के
प्रति मुसलमानों की सोच बहुत बड़े स्तर पर
सकारात्मक हुई है।'
हाल के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुसलमानों के
राजनीतिक समीकरण और बदले हैं। भारत में सबसे
ज्यादा सांसद देने वाले प्रदेश यूपी के मुसलमान
सत्ताधीन समाजवादी पार्टी से भी नाराज हैं
और उसे बीएसपी, कांग्रेस, बीजेपी और नई
नवेली आम आदमी पार्टी के बीच
अपना फैसला करना है। यह दुर्भाग्य है
कि मुसलमानों के ध्रुवीकरण में दंगों की प्रमुख
भूमिका होती है। संजय कुमार के शब्दों में,
'मुसलमानों के लिए अपनी हिफाजत अहम
मुद्दा बन गया है।'